स्रोत एवं गणना विधि
पंचांग, नक्षत्र एवं कुंडली गणना में प्रयुक्त खगोलीय गणित तथा धार्मिक संदर्भों का पारदर्शी विवरण।
१. खगोलीय गणना इंजन
सूर्य, चन्द्रमा एवं अन्य नवग्रहों की खगोलीय गणना हेतु आधुनिक VSOP87 एवं NOVAS C 3.1 सिद्धांतों का उपयोग किया जाता है। यह एल्गोरिदम खुला स्रोत (MIT लाइसेंस) है और सीधे आपके ब्राउज़र में निष्पादित होता है।
२. अयनांश मानक (लाहिड़ी / चित्रापक्षीय)
सायान भोगांश से निरयण भोगांश प्राप्त करने हेतु भारत सरकार की पंचांग सुधार समिति द्वारा अधिकृत लाहिड़ी (चित्रापक्षीय) अयनांश का उपयोग किया जाता है:
- मानक युग (J2000.0): १ जनवरी २००० को अयनांश का मान २३° ५१' २५.५३" निर्धारित है।
- अयन गति: वार्षिक अयन गति लगभग ५०.२९ विकला (arcseconds) प्रति वर्ष के अनुसार समायोजित होती है।
३. सूर्योदय एवं सूर्यास्त निर्धारण नियम
सूर्योदय एवं सूर्यास्त का समय स्थानीय धरातल पर स्थित प्रेक्षक (Topocentric) के आधार पर निकाला जाता है:
- वायुमंडलीय अपवर्तन: समुद्र तल पर ३४ कला (0.5667°) का शास्त्रीय अपवर्तन।
- सूर्य का अर्धव्यास: १६ कला (0.2667°)।
- उदयास्त बिंदु: जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज को स्पर्श करता है, तब सूर्य का केंद्र ९०° ५०' पर होता है।
४. पंचांग के पाँच अंगों की गणितीय परिभाषाएं
- तिथि: (चन्द्र भोगांश − सूर्य भोगांश) / १२° के आधार पर।
- नक्षत्र: चन्द्रमा के निरयण भोगांश को १३° २०' के २७ समान भागों में बांटकर।
- योग: (चन्द्र भोगांश + सूर्य भोगांश) / १३° २०'।
- करण: तिथि का आधा भाग (६ अंश)।
- राहु काल व चौघड़िया: सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को ८ बराबर भागों में विभाजित कर।
५. शास्त्रीय एवं पौराणिक ग्रंथ
- सूर्य सिद्धांत (प्राचीन भारतीय खगोल शास्त्र)
- बृहत्पाराशर होराशास्त्र एवं बृहत्संहिता
- निर्णयसिंधु एवं धर्मसिंधु (पर्व-त्यौहार एवं व्रत निर्णय)
- भारत सरकार के राष्ट्रीय पंचांग के प्रामाणिक प्रकाशन