कार्तिक (अमावस्या)माँ लक्ष्मी एवं भगवान श्री गणेश

दीपावली (दिवाली)

दीपावली प्रकाश का महापर्व है, जो अंधकार पर प्रकाश और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। इस दिन भगवान श्री राम लंका विजय उपरांत अयोध्या पधारे थे।

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प्रमाणित मुहूर्त

दीपावली (दिवाली) पूजा मुहूर्त (२०२६)

दिनांक (२०२६)2026-11-08
शुभ पूजा समयसायं 05:40 से 07:38 तक
प्रदोष कालसायं 05:30 से 08:08 तक
शुभ लग्नवृषभ लग्न (स्थिर लग्न — सायं 05:40 से 07:38 तक)

आगामी वर्षों की तिथियाँ (२०२५ - २०२७)

वर्षपर्व दिनांकतिथि एवं मास
२०२५2025-10-20कार्तिक (अमावस्या)
२०२६ (वर्तमान वर्ष)2026-11-08कार्तिक (अमावस्या)
२०२७2027-10-29कार्तिक (अमावस्या)

धार्मिक महत्व एवं पौराणिक कथा

कार्तिक अमावस्या की पावन निशा में महालक्ष्मी एवं विघ्नहर्ता गणेश जी की विशेष अर्चना की जाती है। मिट्टी के दीपकों से घरों को आलोकित कर सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।

सरल एवं शास्त्रोक्त पूजा विधि

  1. पूजा स्थल को पूर्णतः स्वच्छ कर गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें।
  2. लकड़ी की चौकी पर नया लाल या पीला रेशमी वस्त्र बिछाएँ।
  3. चौकी पर माँ लक्ष्मी को दाईं ओर एवं विघ्नहर्ता श्री गणेश जी को बाईं ओर स्थापित करें।
  4. कलश में शुद्ध जल, आम के पत्ते, सुपारी, दूर्वा, सिक्का और नारियल रखकर रोली से स्वास्तिक बनाएँ।
  5. शुद्ध देशी गाय के घी का अखंड दीपक और सुगंधित धूप प्रज्वलित करें।
  6. रोली, अक्षत, चंदन, हल्दी, कमल का पुष्प अथवा गेंदे की माला अर्पित करें।
  7. महालक्ष्मी बीज मंत्र एवं ऋग्वैदिक श्री सूक्तम का श्रद्धापूर्वक पाठ करें।
  8. दुकानदारों व व्यापारियों हेतु बही-खाता (चौपड़ा पूजन) एवं कुबेर देव का पूजन करें।
  9. कमल गट्टे, खील-बताशे, फल, मेवे एवं शुद्ध खीर का भोग लगाएँ।
  10. सपरिवार 'ॐ जय लक्ष्मी माता' एवं 'जय गणेश देवा' की भावपूर्ण आरती करें।
  11. घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल, तिजोरी, रसोई एवं तुलसी जी के समीप १३, २१ अथवा ५१ दीपक प्रज्वलित करें।

आवश्यक पूजन सामग्री सूची

✓लक्ष्मी-गणेश जी की नवीन प्रतिमा
✓लाल या पीला रेशमी वस्त्र (चौकी हेतु)
✓शुद्ध गाय का घी एवं मिट्टी के दीपक (१३ से २७)
✓रोली, कुमकुम, चंदन, हल्दी, सिन्दूर
✓अक्षत (अखंडित चावल)
✓पवित्र गंगाजल
✓कलश, आम्रपल्लव एवं जलदार श्रीफल (नारियल)
✓कमल का पुष्प, गेंदे की माला एवं दूर्वा
✓पंचामृत, खील, बताशे, मेवे एवं खीर
✓पान के पत्ते, सुपारी, लौंग, इलायची
✓कमल गट्टा, पीली कौड़ियां, गोमती चक्र
✓नवीन बही-खाता (चौपड़ा) एवं कलम (लेखनी)

पूजन एवं ध्यान हेतु पवित्र मंत्र

महालक्ष्मी महामंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः॥

सरल भावार्थ: O Supreme Goddess Lakshmi, who resides in the lotus, bestow your divine grace, purity, and abundant prosperity upon us.

गणेश गायत्री मंत्र

ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥

सरल भावार्थ: We meditate on the single-tusked Lord with a curved trunk. May Lord Ganesha illuminate our intellect.

कुबेर धन प्राप्ति मंत्र

ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये। धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥

सरल भावार्थ: We offer oblations to Lord Kubera, the treasurer of the celestial realm and master of all wealth. Bless us with ethical abundance.

❓ जिज्ञासा एवं समाधान

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

दिवाली 2026 कब है और लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

दीपावली २०२६ का महापर्व रविवार, ८ नवंबर २०२६ को कार्तिक अमावस्या के दिन मनाया जाएगा। लक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ शुभ मुहूर्त प्रदोष काल एवं स्थिर वृषभ लग्न में सायं ०५:४० से ०७:३८ बजे तक (अवधि: १ घंटा ५८ मिनट) रहेगा।

दीपावली पर लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल एवं स्थिर लग्न में ही क्यों की जाती है?

प्रदोष काल सूर्यास्त के ठीक बाद प्रारंभ होता है। जब प्रदोष काल में स्थिर लग्न (जैसे वृषभ लग्न) का संयोग होता है, तब माँ लक्ष्मी का वास घर व प्रतिष्ठान में चिरस्थायी (अचल) माना जाता है।

दिवाली 2026 पर बही-खाता पूजन (चोपड़ा पूजन) का शुभ मुहूर्त क्या है?

व्यापारियों व दुकानदारों हेतु नए बही-खाते (चौपड़ा) पूजन का श्रेष्ठ समय सायं ०५:४० से ०७:३८ (वृषभ लग्न) अथवा रात्रि लाभ-अमृत चौघड़िया में ०८:४६ से ०१:४० तक रहेगा।

दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व (दीपोत्सव) की तिथियां 2026 में क्या हैं?

पंचदिवसीय दीपोत्सव २०२६ की तिथियां: १. धनतेरस (६ नवंबर २०२६), २. नरक चतुर्दशी/छोटी दिवाली (७ नवंबर २०२६), ३. मुख्य दीपावली/लक्ष्मी पूजन (८ नवंबर २०२६), ४. गोवर्धन पूजा/अन्नकूट (९ नवंबर २०२६), एवं ५. भाई दूज (१० नवंबर २०२६)।

दिवाली पर लक्ष्मी जी और गणेश जी की पूजा एक साथ क्यों की जाती है?

माँ लक्ष्मी धन व समृद्धि की अधिष्ठात्री हैं और भगवान श्री गणेश बुद्धि व विवेक के दाता हैं। विवेक के बिना धन का सदुपयोग संभव नहीं है, अतः धन और बुद्धि दोनों की प्राप्ति हेतु दोनों देवताओं का एक साथ पूजन किया जाता है।

दिवाली पर कितने दीपक जलाने चाहिए और यमदीप का क्या महत्व है?

परंपरागत रूप से कम से कम १३, २१, ३१ अथवा ५१ दीपक जलाए जाते हैं। धनतेरस व छोटी दिवाली पर दक्षिण दिशा की ओर मुख कर चार मुखी यमदीपक अकाल मृत्यु के निवारण हेतु जलाया जाता है। मुख्य दिवाली की रात गोघृत का अखंड दीप पूजा स्थल, मुख्य द्वार, तिजोरी एवं तुलसी के समीप स्थापित किया जाता है।