फाल्गुन (पूर्णिमा)भगवान नृसिंह एवं श्री राधा-कृष्ण
होली (रंगोत्सव एवं होलिका दहन)
होली भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति और अहंकार पर विजय का पर्व है। वसंत ऋतु के आगमन पर रंगों से प्रेम एवं सौहार्द का उत्सव मनाया जाता है।
प्रमाणित मुहूर्त
होली (रंगोत्सव एवं होलिका दहन) पूजा मुहूर्त (२०२६)
दिनांक (२०२६)2026-03-03
शुभ पूजा समयहोलिका दहन: सायं 06:24 से रात्रि 08:52 तक (3 मार्च)
प्रदोष कालसायं 06:24 से 07:50 तक
शुभ लग्नसिंह लग्न
आगामी वर्षों की तिथियाँ (२०२५ - २०२७)
| वर्ष | पर्व दिनांक | तिथि एवं मास |
|---|---|---|
| २०२५ | 2025-03-14 | फाल्गुन (पूर्णिमा) |
| २०२६ (वर्तमान वर्ष) | 2026-03-03 | फाल्गुन (पूर्णिमा) |
| २०२७ | 2027-03-22 | फाल्गुन (पूर्णिमा) |
धार्मिक महत्व एवं पौराणिक कथा
फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका दहन कर नकारात्मकता और बुराइयों की आहुति दी जाती है। अगले दिन धुलेंडी पर अबीर-गुलाल से परस्पर द्वेष भुलाकर प्रेम का रंग घोला जाता है।
सरल एवं शास्त्रोक्त पूजा विधि
- होलिका दहन भद्रा रहित प्रदोष काल में ही करना शास्त्रसम्मत है।
- होलिका स्थल पर गोबर के उपले (बड़कुले) और लकड़ी एकत्र करें।
- जल, अक्षत, हल्दी, कुमकुम और कच्चा सूत ३, ५ या ७ बार लपेटकर परिक्रमा करें।
- नई फसल के गेहूं व चने की बालियां अग्निदेव को अर्पित कर भूनें।
- होलिका की पवित्र भस्म मस्तक पर धारण कर सुख-आरोग्य की कामना करें।
आवश्यक पूजन सामग्री सूची
✓गोबर के उपले व बड़कुले की माला
✓कच्चा सूत
✓रोली, अक्षत, हल्दी, चंदन
✓पुष्प, गुड़ और बताशे
✓गेहूं व चने की नई बालियां
✓गुलाल एवं प्राकृतिक अबीर
पूजन एवं ध्यान हेतु पवित्र मंत्र
भगवान नृसिंह महामंत्र
उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥
सरल भावार्थ: I bow to the ferocious and heroic Lord Narasimha, the flaming omnipresent Mahavishnu, who vanquishes all fear and is the death of death itself.
❓ जिज्ञासा एवं समाधान
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भद्रा में होलिका दहन क्यों वर्जित माना गया है?
शास्त्रों में भद्रा मुख में होलिका दहन पूर्णतः निषिद्ध है। भद्रा पुच्छ या भद्रा समाप्ति के उपरांत ही दहन शुभ फलदायी होता है।