चैत्र (शुक्ल नवमी)मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम
राम नवमी
चैत्र शुक्ल नवमी को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का पावन प्राकट्य अयोध्या धाम में हुआ था।
प्रमाणित मुहूर्त
राम नवमी पूजा मुहूर्त (२०२६)
दिनांक (२०२६)2026-03-27
शुभ पूजा समयप्रातः 11:12 से दोपहर 01:38 तक (मध्याह्न)
प्रदोष कालसायं 06:35 से 08:55 तक
शुभ लग्नकर्क लग्न
आगामी वर्षों की तिथियाँ (२०२५ - २०२७)
| वर्ष | पर्व दिनांक | तिथि एवं मास |
|---|---|---|
| २०२५ | 2025-04-06 | चैत्र (शुक्ल नवमी) |
| २०२६ (वर्तमान वर्ष) | 2026-03-27 | चैत्र (शुक्ल नवमी) |
| २०२७ | 2027-04-15 | चैत्र (शुक्ल नवमी) |
धार्मिक महत्व एवं पौराणिक कथा
दोपहर १२ बजे अभिजीत मुहूर्त एवं कर्क लग्न में प्रभु श्री राम का जन्मोत्सव मनाया जाता है। रामचरितमानस पाठ, भजन एवं पंजरी-पंचामृत का वितरण किया जाता है।
सरल एवं शास्त्रोक्त पूजा विधि
- प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
- दोपहर में मध्याह्न काल में बाल रूप श्री राम (रामलला) का पंचामृत से अभिषेक करें।
- प्रभु को पीले वस्त्र (पीतांबर), मुकुट एवं पुष्पमाला पहनाएं।
- पीले पुष्प, तुलसी दल, केसर-चंदन का तिलक अर्पित करें।
- ठीक दोपहर १२ बजे शंख-घड़ियाल बजाकर 'भए प्रगट कृपाला दीनदयाला' स्तुति का गान करें।
- धनिया की पंजीरी, पंचामृत एवं खीर का भोग लगाएं।
- राम रक्षा स्तोत्र का पाठ कर आरती करें।
आवश्यक पूजन सामग्री सूची
✓रामलला की प्रतिमा
✓गंगाजल एवं पंचामृत
✓पीले वस्त्र
✓तुलसी पत्र
✓केसर, चंदन, अक्षत
✓धनिया की पंजीरी एवं चरणामृत
पूजन एवं ध्यान हेतु पवित्र मंत्र
श्री राम तारक मंत्र
श्री राम जय राम जय जय राम॥
सरल भावार्थ: Victory to Lord Rama, glory and surrender to the Supreme Lord Rama.
❓ जिज्ञासा एवं समाधान
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
राम नवमी की पूजा दोपहर १२ बजे ही क्यों होती है?
गोस्वामी तुलसीदास जी के अनुसार 'नौमी तिथि मधु मास पुनीता, सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता। मध्यदिवस अति सीत न घामा...' प्रभु का जन्म मध्याह्न में हुआ था।